जानिये कैसी है पाकिस्तान के हिन्दुओं की दुर्दशा,हिन्दू लड़कियों का अपहरण,बलात्कार ओर धर्म परिवर्तन की शिकायतों पर बन्दुकों के साये मे होते एक तरफा न्याय,
THE POLICE TODAY
दुनिया का एक ऐसा देश जहां बेटी का पैदा होना मां-बाप पर चिंता और उदासी का पहाड़ टूट पडऩा है , जवान लड़की के अपहरण का हर वक्त डर, अपहरण के तत्पश्चात ही लड़की का इस्लाम में धर्म-परिवर्तन और फौरन मुस्लिम लड़के के साथ जबरदस्ती विवाह, पुलिस या शासन अधिकारियों से लड़की के माता-पिता, रिश्तेदारों की कूक-फरियाद बेकार, पाकिस्तानी मुखिया-चौधरी सब खामोश, लड़की की दम घुट के मर जाने की हालत लेकिन मुंह पर मजबूरी का कुबूलनामा है।
ऐसा नहीं कि यह स्थिति कोई हाल ही में पैदा हुई है। यह खेल तभी से जारी है जब से पाकिस्तान बना है। ऐसा नहीं कि भारत के उन राजनीतिक दलों के नेताओं को इसका ज्ञान नहीं, जिन्होंने नागरिकता कानून के विरुद्ध इन दिनों बवाल मचा रखा है,
हालाकी यहाँ नागरिकता कानून का उदद्देश्य ऐसे पीड़ित हिन्दू-सिख परिवारों को भारत में शरण देने के लिए है।
रही बात पाकिस्तान के कानून की तो वहाँ की संसद हो या सविधान वो सिर्फ बंदूके के इशारे पर नाचता है
जिसमें ‘जबरदस्ती विवाह’ दी जाने वाली हिन्दू लड़कियों की आवाजें भी गुम हैं।
युवा लड़कियों की ‘जबरदस्ती शादी’ कर दिया जाना सिंध के हिन्दू समाज के लिए हमेशा ही एक बड़ा संवेदनशील विषय रहा है। जिन लोगों पर इस तरह (जबरदस्ती शादियां) करवाने का दोष लगाया जाता है वे कह देते हैं यह तो ‘जवां मोहब्बत’ का मामला है जिसे ये (हिन्दू समाज) मीडिया और एक्टिविस्ट (अर्थात सामाजिक कार्यकत्र्ता) गलत रंग में पेश कर रहे हैं,ओर पाकिस्तान का कानून इन अपहरण बालात्कारियों पर इतना दयावान् की इन्हे तुरंत जमानत मिल जाती है चलो गलती हो गई,लेकिन ये सविधान सिर्फ पाकिस्तानियों पर लागू होता है अन्य धर्मों पर नही, सब लोगों को सचाई मालुम होती है लेकिन बोलने का अधिकार किसी को नही क्योंकि वो पकिस्तान के सविधान के खिलाफ है,
अभी हाल ही मे हिंदू समुदाय के सदस्यों ने जबरन धर्मांतरण के खिलाफ प्रदर्शन भी किया है,
हिंदू संगठन ‘पाकिस्तान दारावर इत्तेहाद’ (पीडीआई) ने अभी हाल ही मे कराची प्रेस क्लब के बाहर और सिंध विधानसभा भवन के प्रवेश द्वार पर विरोध प्रदर्शन किया।पाकिस्तान में अल्पसंख्यक हिंदुओं के जबरन धर्म परिवर्तन और देश में हिंदू लड़कियों एवं महिलाओं के जबरन विवाह की समस्या पर ध्यान आकर्षित करने के लिए समुदाय के कई सदस्यों ने यहां मार्च निकाला। अल्पसंख्यक समुदायों की ज्यादातर कम उम्र की लड़कियों को प्रलोभन देकर या ज़बरदस्ती धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर किया जाता है. कम आय वाले परिवार से आने वाली अधिकांश लड़कियां इसका शिकार होती हैं. और जब उन्हें अदालत में पेश किया जाता है, उस समय वो आमतौर पर पाकिस्तानी मुस्लिम मर्दों से घिरी होती हैं.
इसलिए वो उनके ख़िलाफ़ बयान नहीं दे पाती ओर अगर कोई लड़की हिम्मत करके बयान दे भी देती है तो उसके बयान को झूठा ही माना जाता है,है ना कितना अजीब कानून,साफ तौर पर अपने परिवार में वापस जाने का फ़ैसला करने का मतलब है धर्मत्याग और पाकिस्तानी समाज में धर्मत्याग करने का मतलब अपनी ओर अपने परिवार की जान को जोखिम में डालना है,
अगर हम बात करें उन स्थानो की जहां धर्म परिवर्तन के अधिकतर मामले हो रहे है तो क़रीब क़रीब सारे धर्म परिवर्तन के मामले सिंध और पंजाब प्रांत से सामने आ रहे हैं. सिंध में ज़्यादातर लड़कियां हिंदू परिवार की होती हैं और पंजाब में ईसाइयों के मामले ज़्यादा है.
सिंध के दूर दराज़ के इलाकों में धार्मिक संस्थाएं दावा करती हैं कि उन्होंने सैकड़ों हिंदू महिलाओं को इस्लाम कबूल करवाया है. इनमें से ज़्यादातर लड़कियां भील, मेघवार और कोहली जैसी जातियों से आती हैं. अल्पसंख्यकों के अधिकार के लिए काम करने वाले संगठन और हिंदू समुदाय का दावा है कि धर्म परिवर्तन जबरन किया जा रहा है या उन लड़कियों का किया जाता है जो मुस्लिम युवकों के साथ चली जाती हैं.
पीडीआई के एक सदस्य ने कहा, ‘‘हम खासकर ग्रामीण इलाकों में सिंधी हिंदुओं की इस समस्या पर ध्यान आकर्षित करना चाहते थे, जहां 12-13 साल की लड़कियों का दिन-दिहाड़े अपहरण कर लिया जाता है, उन्हें इस्लाम धर्म स्वीकार करने पर मजबूर किया जाता है और फिर किसी अधिक उम्र के मुस्लिम से उनका विवाह करा दिया जाता है।’’
अभी कुछ ऐसे संगठनों नें पकिस्तान मे इस समस्या की लेकर प्रदर्शन भी किया जो वहां हिन्दू धर्म के लिए लड़ाई लड़ने का कार्य करते है हालाकी ऐसे प्रदर्शनकारियों से कुछ दूरी पर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी खड़े हो जाते है लेकिन ज़ब भी इस तरह का कोई प्रदर्शन वहा होरा है तो वह शांतिपूर्ण ही रहता है । अभी कुछ प्रदर्शनकारीयों नें तख्तियां और बैनर लिए फिर से एक कदम उठाया है , जिनमें सरकार से हिंदू लड़कियों और महिलाओं के जबरन धर्म परिवर्तन के खिलाफ रुके हुए विधेयक को पारित करने का आग्रह किया गया है । सिंध प्रांत के विभिन्न जिलों में हिंदू लड़कियों के अपहरण और जबरन धर्म परिवर्तन का मामला 2019 में सिंध विधानसभा में उठाया गया था।
इससे संबंधित एक प्रस्ताव पर बहस हुई थी और कुछ विधानसभा सदस्यों ने कहा था कि इसे केवल हिंदू लड़कियों तक ही सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, जिसके बाद संशोधन करके इसे सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया था, लेकिन जबरन धर्मांतरण को अपराध ठहराने वाले विधेयक को बाद में विधानसभा में खारिज कर दिया गया था। इसी तरह का विधेयक फिर से पेश किया गया था, लेकिन 2021 में इसे खारिज कर दिया गया।
इस साल जनवरी में, संयुक्त राष्ट्र के कम से कम 12 मानवाधिकार विशेषज्ञों ने पाकिस्तान में लड़कियों के अपहरण, जबरन धर्म परिवर्तन और उनके जबरन विवाह की बढ़ती घटनाओं पर चिंता व्यक्त की थी। पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, हर साल लगभग 1,000 लड़कियों का जबरन धर्मांतरण कराया जाता है। आधिकारिक अनुमान के मुताबिक, मुस्लिम बहुल देश में लगभग एक लाख हिंदू रहते हैं।
पाकिस्तान मे पहले भी कानून बनाने की हुई है कोशिश,
पहले भी सिंध विधानसभा ने धर्मांतरण के लिए न्यूनतम आयु पर कानून बनाने की कोशिश की थी, लेकिन इसे कट्टरपंथियों के कड़े विरोध का सामना करना पड़ा.
2016 में, सर्वसम्मति से बिल पारित किया लेकिन धार्मिक समूहों ने इसे गैर-इस्लामिक बताते हुए धर्मांतरण की आयु सीमा पर आपत्ति जताई और राज्यपाल को विधेयक पर हस्ताक्षर करने से रोकने के लिए विधानसभा को घेरने की धमकी दी.
2019 में, अल्पसंख्यक संरक्षण विधेयक का एक संशोधित संस्करण सिंध विधानसभा में एक हिंदू सदस्य नंद कुमार द्वारा पेश किया गया था. फिर से, धार्मिक और राजनीतिक दलों ने विरोध प्रदर्शन किया, यह तर्क देते हुए कि सरकार अल्पसंख्यकों की रक्षा के नाम पर उन लोगों के लिए अवरोध पैदा कर रही है जो धर्म परिवर्तन की इच्छा रखते हैं.
लाल माल्ही, जो खुद एक सिंधी हिंदू हैं, कहते हैं कि धर्मांतरण के लिए न्यूनतम आयु का कानून बनाना एक आदर्श समाधान है, लेकिन उन्हें यह भी डर है कि इसमें बाधाएं आएंगी















