उत्तराखंड में निजी स्कूलों की मनमानी पर कारवाई की तैयारी,शिक्षा की आड़ मे मनमर्ज़ी जमकर लूटा जा रहा अभिभावको को,फिर भी ट्यूशन पढ़ने को मजबूर बच्चे,
NEWS / THE POLICE TODAY
Dehradun / स्कूल अब एक ऐसा व्यापार बना चुके है जहां अभिभावको को इस प्रकार लूटा जा रहा है मानो उन्होंने बच्चों को जन्म देकर कोई बड़ा अपराध कर दिया हो,एक तो नौकरी नही ऊपर से शिक्षा इतनी महंगी की माँ बाप की 75% कमाई तो बच्चो को शिक्षा देने मे ही खर्च करनी पड़ रही है,ओर दुर्भाग्य ये है की न तो इस पर प्रसाशन कोई जांच करता है ओर न ही सरकार इस मनमानी पर कोई ध्यान देने को तैयार है,लेकिन अति हर बात की बुरी होती है बात करें उत्तराखण्ड की तो हो सकता है की अब उत्तराखंड सरकार इस ओर कोई ध्यान दें,
लगातार निजी स्कूलों द्वारा कॉपी किताबों का अतिरिक्त भार अभिभावकों पर पडने की शिकायत मिलने के बाद शिक्षा महकमा सतर्क हो गया है सत्र 2023-24 अप्रैल से प्रारम्भ हो गया है तथा छात्र – छात्राओं एवं उनके अभिभावकों के द्वारा पाठ्य पुस्तकें क्रय की जा रही है। इस संदर्भ में विभिन्न माध्यमों से अभिभावकों एवं जनसामान्य से शिकायतें प्राप्त हो रही है कि राज्य में संचालित विभिन्न बोर्ड के अन्तर्गत मान्यता प्राप्त विद्यालयों में लागू की गयी पाठ्य पुस्तकों की दरें अत्यधिक है, जिससे अभिभावकों पर अनावश्यक व्ययभार पड़ रहा है।
देहरादून राज्य में निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ शिक्षा विभाग अब एक्शन के मूड में है ऐसे निजी स्कूल जिनके द्वारा नए सत्र में मनमाने तरीके से फीस बनाए जाने के साथ ही साथ अभिभावकों पर स्कूल ड्रेस कॉपी किताब जूते मोजे की आड़ में भी परिजनों को लूटा जा रहा है ऐसी शिकायतों का डीडी शिक्षा दी संज्ञान लिया है डीजी शिक्षा बंशीधर तिवारी ने बताया है कि जिला से लेकर ब्लॉक स्तर तक कमेटी गठित कर ऐसी शिकायतों पर कार्रवाई होगी और जल्द ही राज्य का फीस एक्ट तैयार कर लागू कराया जाएगा

आप यह भी अवगत है कि मा0 उच्च न्यायालय नैनीताल में योजित रिट याचिका संख्या 640/645/669/811 /813/ 835 / 2018 एवं 3302 / 2017 में मा0 उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश दिनांक 13 अप्रैल 2018 के अनुपालन में महानिदेशालय के पत्र संख्या – महानिदे0 / 11918-67/ पा०पु० / 2018-19 दिनांक 02 मार्च 2019 के द्वारा समस्त जनपदों को तदनुसार अनुपालनार्थ यथाआवश्यक दिशा-निर्देश प्रसारित किये गये। इसी क्रम में पुनः संज्ञान में लाना है कि आई०सी०एस०ई० बोर्ड से मान्यता प्राप्त विद्यालयों को छोड़कर अन्य समस्त विद्यालयों में लागू की जा रही पुस्तकें पूर्णतः एन०सी०ई०आर०टी०/ सी०बी०एस०ई० पाठ्यक्रम आधारित होनी आवश्यक है।















