हिन्दू धर्म मे अंतिम संस्कार के बाद अवश्य करें ये काम,छोड़कर जाणे वाले की आत्मा को मिलती है शांति,
शास्त्रों और पुराणों के अनुसार जीव का जन्म और मरण के बन्धन से छूट जाना ही मोक्ष है। इसे ‘विमोक्ष’, ‘विमुक्ति’ और ‘मुक्ति’ भी कहा जाता है। भारतीय दर्शनों में कहा गया है कि जीव अज्ञान के कारण ही बार बार जन्म लेता और मरता है । इस जन्ममरण के बंधन से छूट जाने का ही नाम मोक्ष है ।
हिंदू धर्म में मृत्यु पश्चात अंतिम संस्कार के कई नियम होते हैं। इन नियमों का पालन करने पर मृतक की आत्मा को शांति मिलती है।
मृत्यु के बाद व्यक्ति की अंतिम यात्रा निकाली जाती है और श्मशान में दाह संस्कार किया जाता है। मृत शरीर को श्मशान में पंचतत्व में विलीन कर दिया जाता है। शास्त्रों में इस प्रक्रिया से जुड़े कुछ नियम बताए गए हैं जिनका ध्यान रखने की जरूरत होती हैं। इन नियमों की पालना से जीवात्मा का सफर सुखद होता हैं और अगले जन्म में उत्तम शरीर मिलता हैं।
हिंदू धर्म में दान-दक्षिणा करना महत्वपूर्ण माना गया है। दान दक्षिणा करने का पुण्य न सिर्फ व्यक्ति को इस जन्म में प्राप्त होता है बल्कि मृत्यु के बाद व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है।गरुण पुराण के अनुसार जब किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है तो उसका सब कुछ धरती पर धरा का धरा रह जाता है। केवल उसके कर्म ही उसके साथ जाते हैं. इसलिए जीवन में पुण्य कर्म और दान करते रहें। गरुड़ पुराण में व्यक्ति को अपने जीवन काल में मृत्यु से पहले तिल, सोना, नमक, जलपात्र, लोहा, रुई, और 7 तरह के अनाजों का दान करने की बात कही गई है।
भोजन– यदि परिवार में किसी की मृत्यु हो गई हो तो अंतिम संस्कार के बाद गरीबों में भोजन का दान करें। गरीब को भोजन कराएँ। ऐसा करने से मरने वाले की आत्मा को शांति मिलती है।
वस्त्र-अपनी क्षमता के अनुसार अंतिम संस्कार के बाद वस्त्र का दान करें ये दान किसी पंडित को करें तो 5 कपड़े या 7 कपड़े करें।
पक्षियों को अनाज– अंतिम संस्कार के बाद लगातार नियम से पक्षियों को अनाज डालें, ऐसा करने से मरने वाले की आत्मा को शांति मिलती है।
वही मरने के बाद यानि अंतिम संस्कार के बाद मरने वाले के परिवार को इन 3 चीजों का दान जरुर करना चाहिए।















