जानिये कौन है ये मुस्लिम परिवार जिन्होंने उत्तराखण्ड आकर हिन्दू धर्म मे की वापसी,अपनाया सनातन धर्म,
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उत्तराखंड / सनातन का अर्थ है जो शाश्वत हो, सदा के लिए सत्य हो। जिन बातों का शाश्वत महत्व हो वही सनातन कही गई है। जैसे सत्य सनातन है। ईश्वर ही सत्य है, आत्मा ही सत्य है, मोक्ष ही सत्य है और इस सत्य के मार्ग को बताने वाला धर्म ही सनातन धर्म भी सत्य है। वह सत्य जो अनादि काल से चला आ रहा है और जिसका कभी भी अंत नहीं होगा वह ही सनातन या शाश्वत है। जिनका न प्रारंभ है और जिनका न अंत है उस सत्य को ही सनातन कहते हैं। यही सनातन धर्म का सत्य है।धार्मिक गुरुओं की अगर माने तो उनका कथन है की इस धरती पर अगर सबसे प्राचीन धर्म कोई है तो वो हिन्दू धर्म है इसी धर्म से निकलकर अन्य धर्म बने,ऐसे बाद मे बने धर्मों से अगर कोई हिन्दू धर्म मे वापसी करता है तो ये गर्व की बात है,
श्री साधना मंदिर धर्मार्थ ट्रस्ट ब्रह्मपुरी ऋषिकेश में सोनीपत हरियाणा से आए तीन जाट मुस्लिम परिवारों के मुखिया ने घर वापसी की है। तीनों परिवार के मुखिया ने संस्था के अध्यक्ष महंत सुरेशदास महाराज के सानिध्य में माँ गंगा के पावन तट पर महंत महामंडलेश्वर हरिदास महाराज की अध्यक्षता में अभयनाथ योगी से दीक्षा ली। उसके बाद सनातन वैदिक पद्धति से उनका शुद्धोधक स्नान के साथ संकल्प करवाया गया, फिर प्रायश्चित हवन के साथ सनातन धर्म में वापसी कराई गई।
जानकारी के मुताबिक ये तीनों ऐसे परिवारों से हैं, जिनके पूर्वज कभी जाट चौधरी हिंदू थे और वर्तमान में मुस्लिम हैं। इस अवसर पर हिमालय परिवार युवा वाहिनी के संयोजक रविराज, हिमालय परिवार युवा वाहिनी जिला इकाई टिहरी के युवा अध्यक्ष दीपकदास योगी, आरोग्यधाम सिद्धक पीठ के संस्थापक सुखिआनंद बाबा, स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता दिव्यांशु नेगी, सुरेंद्र, मनोहर लाल काद्द्यान, चक्रपाणि दास, मुकेश नाथ, हेमंत, गजानंद महाराज आदि उपस्थित रहे।
बता दें कि देशभर में लोग सनातन धर्म से प्रभावित होकर घर वापसी कर रहे हैं। इससे पहले बीते माह मध्यप्रदेश में झाबुआ जिले के धामंदा गांव में एक परिवार के आठ लोगों ने घर वापसी की थी। इन लोगों को स्वास्थ्य सुविधाओं का प्रलोभन देकर 9 साल पहले ईसाई बना दिया गया था। उससे पहले झारखंड के साहिबगंज में 60 परिवार के 111 वनवासियों ने ईसाई पंथ छोड़कर सनातन धर्म अपनाया था। उन्हें भी प्रलोभन देकर ईसाई बना दिया गया था।















