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आखिर क्यों रहते है 24 घंटे इस पेड़ कि सुरक्षा मे तैनात भारतीय कमाँडो ,जानिये कहाँ ओर कितना पुराना है ये वृक्ष,

NEWS / The Police Today

भारत एक ऐसा देश है जिसे सम्पूर्ण विश्व मे प्राचीन संस्कृति सभ्यता ओर रहश्यों के कारण जाना जाता है,यहाँ कि मिट्टी हवा ओर जलवायु मे भी एक सुगंध बरसती है,प्रति वर्ष लगते मेले ओर त्यौहारों पर यहाँ पूजा पाठ हवन आरती ओर भजन कि आवाजे कानो मे पहुंचकर मनुष्य को सकारात्मक ऊर्जा कि ओर लें जाती है,लेकिन क्या आप जानते है कि भारत मे इतना ही नही,बल्कि कितना रहस्य छुपा है इसकी कल्पना करना भी मुश्किल है

भारत में कई ऐसी अनोखी चीजें हैं जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं, जब तक लोगों ने ऐसी चीजों का नाम तक नहीं सुना होगा। आज हम आपको ऐसी ही एक चीज के बारे में बताएंगे, क्या आपने कभी सोचा है कि किसी पेड़ को VIP ट्रीटमेंट मिल सकता है।

जी हां, एक ऐसा पेड़ है जिसके नीचे कमांडो पहरा देते हैं। इतना ही नहीं इस पेड़ के रखरखाव पर लाखों रुपए खर्च करने पड़ते हैं। तो चलिए आपको बताते हैं कहां है ये अनोखा पेड़…

यह पेड़ मध्य प्रदेश के सांची में स्थित है

यह पेड़ मध्य प्रदेश के रायसेन में सांची स्तूप के पास है। इस वीआईपी पेड़ को बोधि वृक्ष कहा जाता है जो हर दिन सुरक्षा के घेरे में रहता है। इस पेड़ की सुरक्षा के लिए 24 घंटे पुलिस के जवान तैनात रहते हैं। सांची स्तूप के पास स्थित इस पेड़ को VIP भी कहा जाता है।

यह पेड़ करीब 2500 साल पुराना है। बोधगया में इसी वृक्ष के नीचे महात्मा बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। इसके बाद हिंदू धर्म के अलावा बौद्ध धर्म में भी इस पेड़ का महत्व बढ़ गया।बौद्ध धर्म में इस पेड़ को बोधि वृक्ष भी कहा जाता है। यह पौधा बिहार के बोधगया से लाया गया था। इस पेड़ की बौद्धों द्वारा भी पूजा की जाती थी। 269 ​​ईसा पूर्व में अशोक के बौद्ध धर्म में रूपांतरण के बाद, सांची में एक स्तूप का निर्माण किया गया और बौद्ध धर्म के विश्वव्यापी प्रचार और प्रसार को गति मिली। अशोक ने अपना राजदूत श्रीलंका भेजा। पौराणिक कथाओं के अनुसार, अशोक ने सांची में लगे बरगद के पेड़ की एक शाखा को भी श्रीलंका भेजा था। कई ऐतिहासिक स्रोत बताते हैं कि अशोक ने इस वृक्ष के स्थल पर एक धार्मिक स्थल की स्थापना भी की और इस वृक्ष की पूजा करने लगे।

इस पेड़ की सुरक्षा के लिए 1 से 4 पुलिसकर्मी चौबीसों घंटे तैनात रहते हैं। इसके रखरखाव पर भी हर साल लाखों रुपये खर्च होते हैं। अब तक 64 लाख खर्च किए जा चुके हैं। पेड़ से गिरने वाले हर पत्ते को इकट्ठा करके सुरक्षित रखा जाता है। इसके अलावा अगर एक पत्ता भी टूटता है तो उसके खिलाफ केस दर्ज किया जाता है।

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